Sunday, December 29, 2013

शोर

शोर है कहीं मोहब्बत का
शोर है जुदाई का,
कहीं भीड़ का शोर हैं 
कहीं हैं तन्हाई का

शोर है मौत का,
सन्नाटे  का शोर है.
शोर है बेबसी का,
कहीं खुशियों का शोर है

खोये हैं कुछ शोर में,
मिलें हैं हम शोर से.
कभी भागते हम शोर से,
कभी पीछा करते शोर का.

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